चुनावी हार के बाद कांग्रेस को सहयोगी दलों से भी मिल रहे ताने, क्या 2024 से पहले ही ‘INDIA’ में घटा कद? – After the election defeat Congress is also getting taunts from opposition parties will INDIA be implemented before 2024? I decreased in height ntc


पांच राज्यों के नतीजे आ गए हैं. इनमें कांग्रेस दो जगह अपनी सरकार नहीं बचा पाई. यानी कुल चार जगह सरकार बना नहीं पाई. एक जगह ही सत्ता से नाराजगी का फायदा कांग्रेस को मिला. बीजेपी ने तीन राज्यों में सरकार बनाई. लगातार होती कांग्रेस की हार और घटते सीट वोट के बीच अब बीजेपी और कांग्रेस के साथी दल ही कांग्रेस की सियासी बीमारी के लक्षण बताने लगे हैं और इलाज भी. कांग्रेस को फिलहाल जरूरत है तो अपनी बीमारी पता लगाने की…

1- लगातार मिलती चुनावी हार.

2- सरकार किसी राज्य में है तो उस सत्ता और सरकार को कांग्रेस कायम नहीं रखपाती.

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3- मुद्दे जो उठाते हैं जनता तक पहुंचा नहीं पाते हैं.

4- लुभावने वादों से शॉर्टकट अपनाकर सत्ता पाना चाहते हैं.

5- विपक्ष के साथी ही कांग्रेस को बताने लगे हैं कि कांग्रेस पार्टी दंभ में चुनाव लड़ने लगी है.

6- सहयोगियों को साथ लेकर नहीं चल पाती है.

7- सीट शेयरिंग के नाम पर अपना अहम ऊपर रखती है.

8- नकारात्मक रूप से चुनाव लड़ना.

9- विरोध के नाम पर सिर्फ विरोध करना.

10- जनता का विश्वास जीतने में लगातार नाकाम.

अब इनमें सुधार के लिए कांग्रेस जब तक मंथन बैठक करती उससे पहले प्रधानमंत्री ने ही सलाह की गोली दी. नसीहत का टॉनिक दिया. जनता के संदेश इंजेक्शन लेने को कहा और बताया कि मौका है, सुधार कांग्रेस में हो सकता है.

तीन राज्यों में जीत की हैट्रिक लगाने के बाद संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मीडिया के पास पहुंचकर प्रधानमंत्री बोले, वो विपक्ष में हैं तो भी उनको एक अच्‍छी एडवाइस दे रहा हूं. बाहर की पराजय का गुस्‍सा सदन में मत उतारना. विरोध के लिए विरोध का तरीका छोड़िए. पीएम ने कहा, देश की जनता ने आज साफ-साफ संदेश दे दिया है, मेरी कांग्रेस और उसके साथियों को नम्रतापूर्वक सलाह है. कांग्रेस और उसके घमंडिया गठबंधन के लिए भी बहुत बड़ा सबक है. सुधर जाइए, वरना जनता आपको चुन-चुनकर के साफ कर देगी.

कुछ ही राज्यों यानी गिनती के तीन राज्यों में सत्ताधारी कांग्रेस और कांग्रेस के सहयोगियों को पिछले 24 घंटे में बहुत कुछ प्रधानमंत्री ने दिया है. पीएम मोदी ने विपक्ष को फ्री की ही सलाह दे दी है. 

पीएम की विपक्ष को नसीहत 

पीएम ने कहा, हर किसी का भविष्‍य उज्‍जवल है, निराश होने की जरूरत नहीं है. लेकिन कृपा करके बाहर की पराजय का गुस्‍सा सदन में मत उतारना. हताशा-निराशा होगी, आपके साथियों को आपका दम दिखाने के लिए कुछ न कुछ करना भी पड़ेगा, लेकिन कम से कम लोकतंत्र के इस मंदिर को वो मंच मत बनाइए और अभी भी मैं कहता हूं, मैं मेरे लं‍बे अनुभव के आधार पर कहता हूं थोड़ा सा अपना रुख बदलिए, विरोध के लिए विरोध का तरीका छोडि़ए, देश हित में सकारात्‍मक चीजों का साथ दीजिए. जिस चीज में जो कमियां हैं उसकी डिबेट कीजिए. आप देखिए, देश के मन में आज जो ऐसी कुछ बातों पर नफरत पैदा हो रही है, हो सकता है वो मोहब्‍बत में बदल जाए. तो मौका है, ये मौका जाने मत दीजिए. 
 
प्रधानमंत्री की सलाह के एक एक शब्द को डिकोड करें तो, 

पराजय शब्द-इसलिए बोला क्योंकि कांग्रेस की चार राज्यों में बुरी हार हुई.

गुस्सा इसलिए बोला- ताकि संसद सत्र में हंगामा कांग्रेस ना करे.

विरोध के लिए विरोध- इसके बहाने सीख दी है कि राजनीति का तरीका अब कांग्रेस बदले.

नफरत- इसलिए बोला है क्योंकि फिर से अब चार राज्यों में कांग्रेस जीत नहीं पाई है. 

मोहब्बत शब्द इसलिए इस्तेमाल किया ताकि सिर्फ सियासी दिखावा ना हो.

मौका- यानी सुधार लाया जाए. 

संभव है कि आप कहें कि इसी साल कांग्रेस पार्टी कर्नाटक भी जीती है. हिमाचल भी जीती है. हारी तो बीजेपी भी है. फिर क्यों प्रधानमंत्री सलाह दे रहे हैं.

इसलिए हमने कुछ और आंकड़े खोजे,

कांग्रेस को खासकर नसीहत इसलिए प्रधानमंत्री देने लगे क्योंकि 

1- 2014 से 2023 के बीच 60 विधानसभा चुनावों में 46 चुनाव कांग्रेस हार चुकी है. दो लगातार लोकसभा चुनाव की हार अलग.

2- 2011 के बाद यानी पिछले 12 साल में कांग्रेस किसी राज्य में सत्ता रहते प्रो इनकंबेसी के साथ दोबारा नहीं लौटी है.

3- यानी किसी राज्य में दूसरे दल के शासन के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर खुद बनी तो विकल्प के तौर पर कांग्रेस को जीत का मौका मिला है. अपने दम पर सरकार कांग्रेस दोबारा नहीं जिता पाई है.

इसीलिए लगातार चुनाव हारने की राजनीतिक बीमारी के जाल में फंसती कांग्रेस के लिए प्रधानमंत्री ने सलाह दी है.

फिलहाल तो दुनिया की सुर्खियों में मोदी की जीत के चर्चे हैं और संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन जब नरेंद्र मोदी सदन में पहुंचते हैं तो बीजेपी सांसदों-मंत्रियों ने दो नारे लगाए. पहला नारा- तीसरी बार,मोदी सरकार और दूसरा नारा- बार-बार मोदी सरकार. इन्हीं नारों के बीच आज की अहम खबर यह भी रही कि अब INDIA गठबंधन में दरार साफ दिखने लगी है. 

INDIA की बैठक से पहले ही कांग्रेस को नसीहत देने लगे सहयोगी दल

क्योंकि 6 दिसंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक होनी थी. चर्चा ये चली कि कांग्रेस ने इन चुनावों में सोचा था कि जीत हासिल करेंगे फिर गठबंधन की बैठक में अपना हाथ ऊपर करके बात सहयोगियों से करेंगे. लेकिन अब बाजी पलट गई है.

लेकिन इन नतीजों के बाद इंडिया गठबंधन के चार बड़े दल अब तक कांग्रेस की हार का बाद उसकी नीति, नीयत और सोच पर सवाल उठा चुके हैं. 

– कांग्रेस को गठबंधन के साथी नेतृत्व क्षमता की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

– प्रधानमंत्री मोदी इंडिया गठबंधन को घमंडिया गठबंधन ही बोलते हैं और अब कांग्रेस के ही साथी दल कांग्रेस के दंभ पर सवाल उठाने लगे हैं. 

– चौथा घेरा इस बात का है कि कांग्रेस सीट शेयरिंग में अब भी नहीं सुधरी तो नुकसान होगा.

– पांचवीं अहम बात- कांग्रेस को दूसरे दलों के नेताओं का सम्मान ना करने पर साथी घेर रहे हैं.

यानी पीएम मोदी के अलावा उसके अपने सहयोगी दल भी उसे नसीहत दे रहे हैं. सिर्फ नसीहत ही नहीं कुछ दल तो चार राज्यों में हार के बाद कांग्रेस को जमीनी हकीकत तक बताने लगे हैं.

बैठक से ममता ने किया किनारा

ममता बनर्जी की टीएमसी- कह रही है कि हमको तो पता ही नहीं बैठक कब बुलाई गई. नीतीश कुमार की जेडीयू कह रही- कांग्रेस अपने दंभ की वजह से चुनाव हारी. नेशनल कॉन्फ्रेंस वाले उमर अब्दुल्ला कह रहे- ऐसी हालत में तो 2024 में भी नहीं हरा पाएंगे. अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के नेता बोल रहे- साथियों का अपमान करना कांग्रेस अब बंद करे.

कुछ अलग था कांग्रेस का प्लान

जो कांग्रेस पहले चुनाव जीतकर अपने आप को बड़ी पार्टी के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहती थी. अब वो बैकफुट पर है और कांग्रेस के चुनाव हारने के बाद फ्रंट पर आने का मौका अन्य दलों को मिल गया है. 

विजय चौधरी, अशोक चौधरी और केसी त्यागी. तीनों नीतीश कुमार की पार्टी के नेता हैं. इन तीनों को एक साथ सुनिए. पता चलेगा कांग्रेस को कैसे आइना देखने की बात करने लगे हैं.

बिहार के बाद अब बात बंगाल की. जहां रविवार को नतीजा आने के दिन ही टीएमसी अपना अभियान चलाती दिखी. नतीजे आए तो टीएमसी के मुखपत्र जागो बांग्ला में लिखा गया कि- कांग्रेस के भीतर जमींदार वाली सोच है. कांग्रेस को हार के बाद अब सोचना पडे़गा.

‘कांग्रेस को सोचना चाहिए’

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा, कांग्रेस की डबल स्टैंटर्ड पॉलिटिक्स है, सीपीएम के साथ मिलकर दलाली कर रहा है. वहां ईडी बुरी है, जब बीजेपी ईडी टीएमसी पर करती है तो सपोर्ट करता है कांग्रेस, सोचना चाहिए लीडरशिप को.

अब घट गया कांग्रेस का कद?

इन नसीहतों का मतलब ये है कि अब लोकसभा चुनाव से पहले अगर इंडिया गठबंधन जारी रहता है, तो कांग्रेस के पास राज्यों में सीट शेयरिंग में अपर हैंड यानी खुद को ऊपर रखने वाली ताकत नहीं बची है.  



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