यूपी से चुनाव प्रचार शुरू कर पीएम मोदी को चुनौती या कांग्रेस को मैसेज दे रहे हैं नीतीश कुमार, CM का बड़ा खेला


नई दिल्‍ली: बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी स्क्रिप्‍ट लिखनी शुरू कर दी है। वह सियासी खेल के माहिर हैं। उन्‍हें एक तीर से कई शिकार करने के लिए जाना जाता है। नीतीश जो कुछ भी करते हैं उसे समझना इतना आसान नहीं होता है। वह हमेशा हर रास्‍ता खुला रखते हैं। जब जिससे गणित बैठ जाए वह उसी के साथ हो लेते हैं। फिर नीतीश ने कुछ वैसा ही किया है। I.N.D.I.A गठबंधन को बनाने की जद्दोजेहद में शुरुआत से लगने वाले नीतीश ने बड़ा ऐलान किया है। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले वह 24 दिसंबर को रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में एक सार्वजनिक सभा करेंगे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का हिस्सा है। बिहार के मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के सचिव (संगठन) श्रवण कुमार ने कार्यक्रम की पुष्टि की है। इसे सिर्फ पीएम मोदी को चुनौती देने की कवायद समझी जाए तो गलत होगा। सच तो यह है कि इसके जरिये सीएम नीतीश कुमार कांग्रेस को भी मैसेज दे रहे हैं। यह बड़ा खेला है जिसे समझने की जरूरत है।

रोहनिया वाराणसी का पटेल बहुल विधानसभा क्षेत्र है। 2012 के बाद से हर विधानसभा चुनाव में इस समुदाय ने रोहनिया में निर्णायक भूमिका निभाई है। उस साल अनुप्रिया पटेल ने संयुक्त अपना दल के उम्मीदवार के रूप में रोहनिया विधानसभा सीट जीती थी। वह वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। 2014 में मिर्जापुर से सांसद चुने जाने के बाद अनुप्रिया की विधानसभा सीट खाली हो गई थी। 2014 में रोहनिया विधानसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के महेंद्र सिंह पटेल ने सीट जीती थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुरेंद्र नारायण सिंह निर्वाचित हुए थे। साल 2022 में बीजेपी की सहयोगी अपना दल (एस) के उम्मीदवार सुनील पटेल ने सीट जीती।

ओबीसी कार्ड खेलने में सबसे आगे निकल चुके हैं नीतीश
नीतीश कुमार बिहार में जातीय जनगणना कराकर ओबीसी कार्ड को खेलने में सबसे आगे निकल चुके हैं। हाल में पांच राज्‍यों में चुनावी नतीजों में बीजेपी की शानदार जीत के बाद वह कांग्रेस को साफ मैसेज देना चाहते हैं। नीतीश बताना चाहते हैं कि कांग्रेस इस मुगालते में न रहे कि वह इकलौती पार्टी है जो बीजेपी को केंद्र की सत्‍ता से उखाड़ फेंकना चाहती है। दूसरे क्षेत्रीय दल भी इसके लिए उतने ही बेकरार हैं। I.N.D.I.A ब्‍लॉक मिलकर ही बीजेपी को चुनौती दे सकता है। ऐसे में कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बैठाने की जरूरत है।

नीतीश कुमार जो भाषा बोल रहे हैं वह दिखाती है कि वह किसी भी समय वक्‍त देखकर पलटी मार सकते हैं। उन्‍होंने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया है। सत्तारूढ़ बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए बिहार के सीएम ने आरोप लगाया कि जाति और धर्म उनके एजेंडे में हैं जबकि ‘हमारा एजेंडा भाईचारा और प्यार है।’

दूसरी तरफ कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नीतीश बोले कि I.N.D.I.A गठबंधन के कुछ नेताओं ने गलतियां कीं। इसके कारण लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने में थोड़ी देरी हुई। अब हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि आगे कोई गलती न हो। हम लोकसभा चुनाव के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करने जा रहे हैं।

व‍िधानसभा चुनावों ने बदल दिए हैं सारे समीकरण
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन अगर जोदार होता तो निश्चित ही वह ज्‍यादा कमांडिंग पोजिशन में होती। लेकिन, आज की तारीख में उसके पास वो एडवांटेज नहीं है। उसने क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर ही अपनी रणनीति सेट करनी होगी। इस पूरे खेल में नीतीश की भूमिका बहुत अहम रहने वाली है। वह कांग्रेस से खफा तमाम सहयोगी दलों को दोबारा मजबूती के साथ एक छतरी के नीचे ला सकते हैं। यहां एक और बात ध्‍यान देने वाली है। यूपी से नीतीश के चुनाव प्रचार का ऐलान विपक्षी गठबंधन की अगली बैठक से ठीक पहले हुआ है। विपक्षी गठबंधन की अगली बैठक 19 दिसंबर को होगी। इसमें सीट बंटवारे और न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चर्चा एजेंडे में सबसे ऊपर होंगे।



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