delhi police register three cases over violence during muharram procession in nangloi area

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पश्चिमी दिल्ली के नांगलोई इलाके में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बवाल करने वाले शरारती तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने पुलिस के साथ झड़प और सुरक्षा में तैनात जवानों पर पथराव करने की घटनाओं को लेकर तीन मामले दर्ज किए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस झड़प में छह पुलिस कर्मियों समेत 12 लोग घायल हुए थे। पहली एफआईआर नांगलोई SHO प्रभु दयाल की शिकायत पर नांगलोई पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

पुलिस उपायुक्त (बाहरी) हरेंद्र सिंह ने बताया कि दूसरी प्राथमिकी नांगलोई पुलिस स्टेशन में कानून व्यवस्था निरीक्षक नानग राम की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। वहीं तीसरी एफआईआर नांगलोई में मेट्रो स्टेशन के पास की घटना के लिए हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। तीनों मामले रविवार को दर्ज किए गए।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि उपद्रवियों की पहचान करने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज की छानबीन की जा रही है। यही नहीं शनिवार को सोशल मीडिया पर किस तरह के संदेश और वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित किए गए, पुलिस उनका विश्लेषण भी कर रही है। उपद्रवियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। हालात सामान्य हैं। पुलिस कानून व्यवस्था पर कड़ी नजर रख रही है।

पुलिस अधिकारियों की मानें तो शनिवार को मुहर्रम जुलूस निकाल रहे मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग ने नांगलोई में पहले से निर्धारित मार्ग पर जाने से इनकार कर दिया और दूसरी ओर का रुख करने लगे। इस पर सुरक्षा में तैनात जवानों ने उन्हें रोका और पहले से तय किए गए रास्ते पर जाने की गुजारिश की। इस पर भीड़ में शामिल उपद्रव तत्वों ने पुलिसकर्मियों के साथ झड़प शुरू कर दी। उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें 12 लोग घायल हो गए जबकि कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।

इससे पहले कि कोई बड़ा उपद्रव होता पुलिस ने फौरी कार्रवाई करते हुए ‘उपद्रवियों की भीड़’ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। पुलिस उपायुक्त (बाहरी) हरेंद्र सिंह ने बताया कि नांगलोई इलाके में ताजिया जुलूस में लगभग आठ से दस हजार लोगों ने हिस्सा लिया। पूरा त्यौहार शांतिपूर्ण रहा लेकिन जुलूस के अंत में मुख्य रोहतक रोड पर एक या दो आयोजकों में शामिल कुछ उपद्रवि अनियंत्रित हो गए। इन शरारती तत्वों ने पहले से तय किए गए रास्ते से दूसरी ओर जाने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें पूर्व-निर्धारित मार्ग से गुजरने के लिए मनाने का प्रयास किया।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि ताजिया आयोजकों में से अधिकांश ने पुलिस का सहयोग किया, कुछ उपद्रवी तत्व ऐसे थे जो अनियंत्रित हो गए और लोगों को भड़काना शुरू किया। इन उपद्रवी तत्वों ने पुलिस और आम लोगों पर पथराव किया। उपद्रवियों ने बसों में बैठे यात्रियों को भी नहीं बख्शा… पथराव के दौरान बसों में बैठे यात्रियों ने सीटों के नीचे छिपकर खुद को बचाया। सिंह के अनुसार, राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जिसमें महिलाएं, बच्चे और मोटर चालक शामिल थे, पुलिस ने हल्के लाठीचार्ज के साथ अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर कर दिया और कानून व्यवस्था तुरंत बहाल कर दी गई। बाद में धार्मिक प्रथाओं के अनुसार ताजिया जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किए गए।

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