Violence again in Manipur, two killed, 45 injured | तेंगनौपाल जिले में 2 जगह फायरिंग, भीड़ ने सुरक्षाबलों का रास्ता रोका, तनाव बरकरार

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इंफाल32 मिनट पहले

पैलेल में भीड़ को हटाने के लिए असम राइफल्स के जवानों ने आंसू गैस के गोले दागे।

मणिपुर के तेंगनौपाल जिले के पैलेल में ​​​​​​फायरिंग की दो अलग-अलग घटनाओं में गुरुवार को दो लोगों की मौत हो गई, 50 अन्य घायल हो गए। घायलों में सेना का एक मेजर भी शामिल है।

पुलिस ने बताया कि पैलेल के मोलनोई गांव में सुबह करीब 6 बजे हथियार लेकर आए लोगों के समूह और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें एक व्यक्ति घायल हो गया। उसे तुरंत ककचिंग के अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं गोली लगने से घायल एक और व्यक्ति को इंफाल क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ले जाया गया। फिलहाल उसकी हालत गंभीर है।

पैलेल में अभी गोलीबारी रुकी हुई है, लेकिन हालात तनावपूर्ण हैं।

पैलेल में आंसू गैस के गोले दागे
जैसे ही फायरिंग की खबर फैली, कमांडो वर्दी पहने मीरा पैबिस और अरामबाई तेंगगोल मिलिशियामेन सहित मैतेई समुदाय लोगों की भीड़ ने सुरक्षा चौकियों को तोड़ने और पैलेल की ओर बढ़ने की कोशिश की।
लेकिन असम राइफल्स के जवानों ने उन्हें रोक लिया।रोके जाने पर, भीड़ में शामिल कुछ हथियारबंद लोगों ने, जो पुलिस की वर्दी पहने हुए थे, फायरिंग शुरू कर दी। इसमें सेना का एक मेजर गोली लगने से घायल हो गया। घटना में तीन अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। क्रास फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

घायल मेजर को बाद में हेलिकॉप्टर से लीमाखोंग के सैनिक अस्पताल में ले जाया गया।

हालात काबू करने के लिए असम राइफल्स के जवानों ने आंसू गैस के गोले दागे। इसमें करीब 45 महिलाएं और कुछ जवान घायल हो गए। दूसरी तरफ भीड़ को काबू करने के लिए इंफाल से पैलेल जा रहे RAF कर्मियों के दल को स्थानीय लोगों और मीरा पैबिस के लोगों ने थौबल में रोक दिया।

पांच जिलों में कर्फ्यू जारी
बुधवार को हजारों प्रदर्शनकारी बिष्णुपुर जिले के फौगाकचाओ इखाई में इकट्ठा हुए थे। वे सभी तोरबुंग में अपने सूने पड़े घरों तक पहुंचने के लिए सेना के बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि भीड़ आदिवासियों पर हमला करने के अलावा उनके घरों में तोड़फोड़ करना चाहती थी।

इसके बाद एहतियात के तौर पर मणिपुर के सभी पांच घाटी जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया था।

3 मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में अब तक 160 से अधिक लोग मारे गए हैं। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि नागा और कुकी सहित आदिवासी 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिले में रहते हैं।

3 मई से जारी हिंसा में 160 से ज्यादा मौतें
राज्य में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच 3 मई से जारी हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया था कि मणिपुर में 6 हजार 523 FIR दर्ज की गई हैं। इनमें से 11 केस महिलाओं और बच्चों की हिंसा से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को कहा था कि मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की जांच 42 स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमें (SIT) करेंगी।

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मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

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मणिपुर में हिंसा शुरू हुए ढाई महीने से ज्यादा हो चुके हैं। जल चुके 120 से ज्यादा गांव, 3,500 घर, 220 चर्च और 15 मंदिर हिंसा की निशानी के तौर पर खड़े हैं। इस तबाही में खाली स्कूल और खेत भी जुड़ चुके हैं। अब स्कूलों के खुलने का वक्त है और खेतों में बुआई का। पूरी खबर पढ़ें…

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